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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 80, Verse 4

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 80, verse 4 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 80 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

रूपकर्दममेतन्मानयनास्वादयाधम । नश्यत्येतन्निमेषेण भवन्तमपि हिंसति ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

सम्यक्‌ ज्ञान में मोक्ष देने की सामर्थ्य है, ऐसा कहते हैं। श्रीरामजी, आत्मा का यथार्थ ज्ञान न होने से जन्म होता है और आत्मा के यथार्थ ज्ञान से मोक्ष होता है। रज्जु का यथार्थ ज्ञान न होने से रज्जु सर्परूप हो जाती है और उसका यथार्थ ज्ञान होने से रज्जु सर्परूप नहीं होती यानी सर्पभाव से रज्जु का मोक्ष हो जाता है, यह भाव हे