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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 80, Verse 3

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 80, verse 3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 80 · श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

नयने रूपनिर्मग्ने क्षोभः क इव देहिनः । गर्दभे पल्वले मग्ने कैव सेनापतेः क्षतिः ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ

इसी प्रकार जगत्‌ का बाध कर आत्मा का परिचय करना भी सम्यक्‌ ज्ञान का लक्षण है, ऐसा कहते हैं । ये जो घट, पट आदि आकारों से युक्त पदार्थों की सैकड़ों पंक्तियाँ हैं, वे सब आत्मस्वरूप ही हैं, उससे भिन्न अन्य कुछ नहीं है, इस प्रकार का निश्चय सम्यक्‌ ज्ञान है