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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 79, Verse 18

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 79, verse 18 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 79 · श्लोक 18

संस्कृत श्लोक

अविचारिणमज्ञानं मूढमाशापरायणम् । निगिरन्तीह दुःखानि बका मत्स्यमिवाजलम् ॥ १८ ॥

हिन्दी अर्थ

प्राणवायु की चचलता के निरोध में निरालम्बन ओर सालम्बन आदि राजयोगरूपी उपायों का उपदेश देने के लिए महाराज वक्तिष्ठ उपक्रम करते है । श्रीवसिष्ठजी ने कहा : भद्र श्रीरामजी, अध्यात्मशास्त्र का उपदेश, ब्रह्मवित्‌ पुरुषों का संसर्ग, विषयों में अनास्थारूपी वैराग्य तथा समाधि के प्रयोजक यम, नियम आदि नियमों के अभ्यास इन उपायों से हृदय में पूर्वाभ्यस्त सांसारिक व्यवहारो में अत्यन्त अनादररूपी अनास्था के दृढ़ हो जाने पर प्राण का परिरपन्दन निरुद्ध हो जाता है