Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 78, Verse 38
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 78, verse 38 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 78 · श्लोक 38
संस्कृत श्लोक
तस्मात्संविन्मये शुद्धे हृदये हृतवासनः ।
बलान्नियोजिते चित्ते प्राणस्पन्दो निरुध्यते ॥ ३८ ॥
हिन्दी अर्थ
जो निरन्तर उत्पत्ति ओर निरन्तर विनाश से समन्वित है ऐसे दग्ध संसार में कारुण्य ओर आनन्द
काक्या प्रसंग हो सकता हे २