Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 78, Verse 19
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 78, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 78 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
यथाभिवाञ्छितध्यानाच्चिरमेकतयोदितात् ।
एकतत्त्वघनाभ्यासात्प्राणस्पन्दो निरुद्ध्यते ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
उसका न आवश्यक
कार्यो के ओर एेहिक ओर पारलौकिक फल के हेतु कर्मो के आरम्भ से प्रयोजन सिद्ध होता है एवं न कर्मो
के अभाव से, न बन्ध से, न मोक्ष से, न पाताल से और न स्वर्ग से ही उसको प्रयोजन है