Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 78, Verse 18
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 78, verse 18 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 78 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
शास्त्रसज्जनसंपर्कवैराग्याभ्यासयोगतः ।
अनास्थायां कृतास्थायां पूर्वसंसारवृत्तिषु ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
तत्त्वज्ञ महात्माओं
को पुण्य कर्मो के अनुष्ठान से न कोई प्रयोजन है और न भोगों से एवं लौकिक कर्मो से प्रयोजन है । न
निषिद्ध कर्मो से, न भोगों के परित्याग से ओर न बन्धुओं से ही प्रयोजन हे