Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 78, Verse 16
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 78, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 78 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
मनःस्पन्दोपशान्त्यायं संसारः प्रविलीयते ।
सूर्यालोकपरिस्पन्दशान्तौ व्यवहृतिर्यथा ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
प्राज्ञ, प्रसन्न और मधुर रहता है, अपनी प्रतिभा के उदय में पूर्ण, खेदरूपी दुर्गति से रहित
तथा समस्त मनुष्यों में स्निग्ध बन्धुभाव रखनेवाला होता है