Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 78, Verse 13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 78, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 78 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
अन्तःप्राणपरिस्पन्दात्संकल्पकलनोन्मुखी ।
संवित्संजायते यैषा तच्चित्तं विद्धि राघव ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
जो तत्त्वज्ञ है, वह अनुकूल और प्रतिकूल
आचरण में तत्पर प्राणी के ऊपर अनासक्त चित्त से, भक्त के विषय में भक्त के आचरण से ओर शठ
के विषय में शठ के सदुश स्थित है