Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 77, Verse 17
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 77, verse 17 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 77 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
उदारचरिताकारः समः सौम्यसुखोदधिः ।
सुस्निग्धः शीतलस्पर्शः पूर्णचन्द्र इवोदितः ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामजी, आपकी नाई संसार का विचारप्रवीण आदि उत्तम बुद्धि से पहले विचारकर जो
अधिकारी पुरुष ब्रह्म मेँ अवगाहन करता है वह कभी संसार मेँ फँसता नहीं है