Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 76, Verse 55
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 76, verse 55 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 76 · श्लोक 55
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
कथित अर्थ को ही स्पष्टरूप से कहते हैं।
हे रामजी, बड़े धैर्य का अवलम्बन कर फल की प्राप्ति तक अनुष्ठित सतत प्रयत्न से जनित दृढ़
निश्चय से युक्त मन से चिरकालिक सिद्धि के लिए यानी प्रतिबन्ध होने पर अनेक जन्मों से होनेवाली
मोक्षात्मक सिद्धि के उद्देश्य से अपने द्वारा ही अपना विचार करना चाहिए । जो निरन्तर अध्यवसाय
करनेवाला पुरुष है, उसके लिए जगत् गाय का खुरमात्र हो जाता है