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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 76, Verse 3

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 76, verse 3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 76 · श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

असम्यक्प्रेक्षणं विद्धि कारणं जगतः स्थितौ । संसारशान्तये कान्त कारणं सम्यगीक्षणम् ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ

राग आदि की कालिमा से शून्य होने के कारण आत्मज्ञान को प्राप्त हुए महाराज मनु ने चिरकाल तक प्रजाओं का पालन करते हुए तथा सर्वदा जीवन्मुक्त स्वरूप होकर राज्य का संरक्षण किया