Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 75, Verse 30
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 75, verse 30 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 75 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
केचित्सुरपदे याता विमानावलिमास्थिताः ।
यथाग्निवायुवरुणयमतुम्बुरुनारदाः ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे मध्यदीपवाला घट,
मध्यज्वालावाला अग्नि ओर प्रस्फुरित कान्तिवाला मणि अपने भीतर प्रकाश को प्राप्त करते हैं, वैस ही
तत्त्ववेत्ता पुरुष अपने भीतर परमप्रकाशस्वरूपता को प्राप्त करता है