Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 75, Verse 23
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 75, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 75 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
जीवन्मुक्तमना मान्यो विश्वामित्रोऽप्ययं प्रभुः ।
वेदोक्तां मखनिर्माणक्रियां समधितिष्ठति ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
इस जड देह के लिए भोगों से क्या प्रयोजन है ? इस प्रकार के निश्चय से युक्त तत्त्वज्ञ पुरुष इच्छाओं के
हेतुभूत मल को (अज्ञान को) ऐसे छिन्न भिन्न कर देता है, जैसे सिंह पींजड़े को छिन्न भिन्न कर देता
है