Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 75, Verse 22
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 75, verse 22 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 75 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
मुनिर्मुक्तस्वभावोऽपि जगज्जङ्गलखण्डकम् ।
नारदो विजहारेमं शीतया कार्यशीलया ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे ताप से तुषार कणिका गल जाती है, वैसे ही “अविद्या का अस्तित्व किसी तरह नहीं है",
इस प्रकार शास्त्र ओर तदनुकूल युक्ति से दृढ़ निश्चय हो जाने पर अविद्या तत्क्षण गल जाती है