Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 75, Verse 20
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 75, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 75 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
गुहो गहनधीर्वीरस्तारकादिरणक्रियाम् ।
मुक्तोऽपि कृतवान्सर्वं ज्ञानरत्नैकसागरः ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
हे रामभद्र, जैसे “यह
मृगजल है” इस प्रकार तात्विक स्वरूप से जाना गया मृगजल प्यासे मृग को अपनी ओर नहीं खींचता,
वैसे ही "यह अविद्या है" इस प्रकार तत्वतः जानी गई अविद्या मनरूपी मृग को नहीं खीचती