Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 74, Verse 8
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 74, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 74 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
तुच्छां मोक्षधियं त्यक्त्वा बन्धबुद्धिं तथैषणाम् ।
स्ववैराग्यविवेकाभ्यां केवलं क्षपयेन्मनः ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
तत्त्वज्ञ से भिन्न ऐसी कोन वस्तु है, जो उसे यदि प्राप्त हो जाय तो वह तन्निबन्धन
हर्ष ओर विषाद से ग्रस्त हो जाय । यदि उसका ऐसी वस्तु के आ जाने से विषाद दिखलाई पड़े तो वह
तत्त्वज्ञ ही नहीं है, किन्तु अतत्त्वज्ञ ही है, क्योंकि ऐसा पुरुष जगन्मय ही होता हे चिन्मय नहीं, यह
जानना चाहिए