Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 74, Verse 6
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 74, verse 6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 74 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
व्यतिरिक्तं हिमाच्छौक्ल्यमिति संकल्प्यते यथा ।
मुधैव कल्प्यते भेदश्चित्ताहंकारयोस्तथा ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
हे रामजी, यों विचारकर आप निश्चयात्मक ज्ञान से युक्त हो जाइये, तदनन्तर आत्मा के भीतर रहनेवाले
जगत् को स्वस्वरूप भूत देखिये । यों जगत् को स्वस्वरूपभूत देखने के अनन्तर आप हर्ष ओर विषाद से
पराजित नहीं होगे