Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 73, Verse 42
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 73, verse 42 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 73 · श्लोक 42
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
तुर्यावस्था में आत्मा न तो प्राप्य है, न अत्यन्त अप्राप्य है, न सर्वात्मक हे, न व्यापक है, न पदों का
वाच्य है, न तो पदों का अवाच्य हे, (क्योकि तुर्यत्वादि पदों से लक्षित होता है), न पाँच भूतो का
आत्मा (स्वभाव) है ओर न पाँच भूतो के स्वरूपभूत ही है