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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 73, Verse 38

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 73, verse 38 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 73 · श्लोक 38

संस्कृत श्लोक

परं प्रबोधमासाद्य चित्ते चित्तत्त्वतां गते । दश मोक्षा न वाञ्छ्यन्ते किमुतैको हि मोक्षकः ॥ ३८ ॥

हिन्दी अर्थ

उक्त प्रकार की दृष्टि का अखण्ड -पूणानन्द -स्फुरणात्मक सुखानुभूति का) अवलम्बन करने पर आत्मस्वरूप को आवृत करनेवाली सुषुप्ति दृष्टि का विच्छेद हो जाता है और आत्मस्वरूप-दृष्ट प्रकाशित रहती है । उसी एकमात्र दृष्टि का अवलम्बन करने पर ही तुर्यावस्था प्राप्त होती है ओर उसीके अवलम्बन से मुक्ति कही जाती है