Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 73, Verse 22
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 73, verse 22 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 73 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
पुर्यष्टकोदयादेव स्वयमात्मानुभूयते ।
सर्वदा सर्वसंस्थः खे घनास्पन्दादिवानिलः ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर
जैसे मद्य के मद से मत्त हुआ पुरुष मद के निकल जाने पर भीतर अपने पूर्व विज्ञान का स्मरण करता है,
वैसे ही आत्मा अपने ही से अपने प्रमाण प्रमेयरूपी विकारों से विनिर्मुक्त स्वरूप को जान लेता हे