Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 73, Verse 21
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 73, verse 21 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 73 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
सत्स्वनन्तपदार्थेषु जीवत्वेनाभिबिम्बति ।
आत्मा पुर्यष्टकादर्शे स्वभाववशतः स्वतः ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
दर्शन का फल बतलाते है।
भूतसमूह को अपने से पृथक् देखकर अविनाशी आत्मा देहातीत हो जाता है ओर जैसे सूर्यकान्त
दिवसमें परम प्रकाश को प्राप्त करती हे, वैसे ही वह परम प्रकाशको प्राप्त करता हे