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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 73, Verse 19

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 73, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 73 · श्लोक 19

संस्कृत श्लोक

नात्मायमयमप्यात्मा संज्ञाभेद इति स्वयम् । तेनैव सर्वगतया शक्त्या स्वात्मनि कल्पितः ॥ १९ ॥

हिन्दी अर्थ

तब किस उपाय से आत्मा भ्रूतसम्बन्ध के हेतुभूत चित्तभाव से मुक्त होता है ? इस प्रश्न पर उस उपाय को बतलाते हैं। जैसे जल अपनी स्पन्दन क्रिया से ही मलिनता का परित्याग कर स्वयं ही स्वच्छता को प्राप्त करता है, वैसे ही आत्मा प्रबोध से विषयरूपता का परित्याग कर स्वयं ही आत्मरूपता को प्राप्त करता है