Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 73, Verse 18
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 73, verse 18 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 73 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
स एव चैवं वदति स च वक्तुं न युज्यते ।
न तदन्यदिदं तात पश्यात्मानमनामयम् ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे सागर आवर्ताकार
की कल्पना से वृद्धिगत आकार को प्राप्त कर तृण, काठ आदि पदार्थों को बटोरता हुआ रहता है, वैसे
ही आत्मा भी चित्ताकृति को प्राप्त कर देह, भूत आदि को बटोरता हुआ रहता है