Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, Verse 8
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 72 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
भूतपञ्चकसंपिण्डाद्रचिता जनताः पृथक् ।
एकस्मादेव विटपाद्विचित्रा इव पुत्रिकाः ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि देहानुभव भ्रम है, तो वही नष्ट हो जाय, इस पर कहते है ।
हे श्रीरामजी, चाहे देह विनष्ट हो जाय, चाहे वह विनष्ट न हो जाय यानी स्थिर रहे, उससे आपको
क्या प्रयोजन है आप तो केवल आत्मज्ञान की स्थिरता में प्रयत्नशील हो जाइये, यह देह जैसे है, वैसा
भले ही बना रहे