Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, Verse 7
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, verse 7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 72 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
यथा कल्पितवेतालविकारभयभीतयः ।
मिथ्यैव कल्पिता एते तथा स्नेहसुखादयः ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि शंका हो कि देह का विनाश हो जाने पर संवित् का विनाश अवर्जनीय होने के कारण संवित्-
स्वरूप मेरा विनाश क्यो नहीं होगा, तो इस पर कहते हैं।
हे श्रीरामजी, शरीररूपी घर का विनाश होता है या नहीं होता ? इस प्रकार के सन्देह चक्र में आप
मत पडिये, क्योकि यह मेरा शरीर है, इत्यादि जो अनुभव है, वह केवल भ्रम है