Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, Verse 54
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, verse 54 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 72 · श्लोक 54
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
उसमें योगांश को कहते हैं ।
हे श्रीरामजी, सभास अज्ञान ही प्राण-धारण करने से “जीव' यों कहा गया है, अहन्ता होने से यानी
सर्वप्रथम “अहम्' (मैं हूँ) यों व्यवहार करने के कारण अहंभाव से (अहंनाम से), निश्चय करने के
कारण बुद्धि नाम से और संकल्प करने के कारण मन नाम से कहा गया है