Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, Verse 53
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, verse 53 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 72 · श्लोक 53
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
प्रतिबिम्ब भाव को संप्राप्त अनन्त आत्मा के द्वारा भासित-सा होकर प्रस्फुरित हुआ उक्त
अज्ञान ही रूढि अंश को लेकर जीव कहा जाता हे । वही इस संसार में महामोहरूपी माया के पिंजडे
मेँ फसा हुआ हाथी है