Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, Verse 34
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, verse 34 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 72 · श्लोक 34
संस्कृत श्लोक
अनुभूतिमयं तस्मात्सारं ब्रह्मेति कथ्यते ।
दृश्यदर्शनसंबन्धे सुखसंविदनुत्तमा ॥ ३४ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे छिद्रयुक्त बाँसों से वायु
के द्वारा शब्द उत्पन्न होते हैं वैसे ही शरीर के कण्ठरूप छिद्र से उद्गत प्राणवायुओं से (जबकि वे कण्ठ,
तालू आदि स्थानो में जिह्ला आदि के द्वारा अभिघात से निकाले जायेंगे, तब) क वर्ग, च वर्ग, टवर्ग, त
वर्ग आदि शब्द प्रकट होते हैं, यह प्रत्यक्ष सिद्ध है