Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, Verse 15
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, verse 15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 72 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
नान्योन्यस्नेहसंबन्धभाजनं शैलपुत्रकाः ।
देहेन्द्रियात्मप्राणाश्च कस्यात्र परिदेवना ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे समुद्र में पूर्ण जल के सिवा दूसरा कुछ भी प्राप्त नहीं होता, वैसे ही जगद्रूप से विस्तृत
आत्मा के सिवा दूसरा कुछ भी प्राप्त नहीं होता