Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, Verse 1
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, verse 1 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 72 · श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
देहे जाते न जातोऽसि देहे नष्टे न नश्यसि ।
त्वमात्मन्यकलङ्कात्मा देहस्तव न कश्चन ॥ १ ॥
हिन्दी अर्थ
उतने ही अंश में कैवल्यपद (केवल चिन्मात्र में अवस्थित- स्वरूप कैवल्यपद) जीवन्मुक्त ओर वेदवचनों
का विषय होता है यानी जीवन्मुक्तो का अधिकृत तथा श्रुतिवाक्यों का प्रतिपाद्य विषय होता है क्योकि
वाक्यजन्य अखण्डाकार वृत्ति का उतने ही अंशमें पर्यवसान है, यह भाव है