Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 71, Verse 31
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 71, verse 31 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 71 · श्लोक 31
संस्कृत श्लोक
यथा तेजस्तिमिरयोर्न संबन्धो न तुल्यता ।
अत्यन्तभिन्नयो राम तथैवात्मशरीरयोः ॥ ३१ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, पहले अनानन्द को यानी अवस्थात्रय पद को प्राप्त हुआ ज्ञानी इस
तुर्यावस्था में तो सदा-सर्वदा केवल आनन्द में ही नियतरूप से लीन होने के कारण विनाश शून्य
स्थिति को (महानन्दपद को) प्राप्त कर अवस्थित रहता है