Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 71, Verse 24
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 71, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 71 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
चिदात्मा निर्मलो नित्यः स्वावभासो निरामयः ।
देहस्त्वनित्यो मलवांस्तेन संबध्यते कथम् ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे वायु से बाहर के वृक्ष, तृण आदि में कपन होने से ऊपर-ऊपर से पर्वत के
प्रस्पन्दित (प्रकम्पित) होने पर भी वास्तव में पर्वत का भीतरी प्रकम्पन नहीं होता, वैसे ही सुषुप्ति दशा
में अवस्थित धीरात्मा तत्त्वज्ञ लौकिक या वैदिक क्रियाओं के होनेपर यों ही ऊपर से चंचलता को प्राप्त
हुआ प्रतीत होता है, परन्तु वास्तव में उसके भीतर कुछ भी कंपन (चाचल्य) नहीं होता