Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 71, Verse 23
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 71, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 71 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
सत्यावलोकनेनैषा मिथ्यादृष्टिर्विनश्यति ।
अवलोकनया साम्यमातपे जलधिर्यथा ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे छह ऋतुओं में
अविकृत स्वभाव होने के कारण पर्वत एक सा रहता है वैसे ही पूर्णचन्द्र के बिम्ब की नाई महान तेजस्वी
पूणत्मि निर्विकार अवस्था में प्रतिष्ठित तत्त्वज्ञ समस्त आपत्तियों की अवस्थाओं मे सदा सर्वदा एक सा
रहता है