Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 71, Verse 21
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 71, verse 21 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 71 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
अविनाभाविनोर्यस्तु संबन्धः कथमेतयोः ।
जडचेतनयोर्देहदेहिनोरनुभूयते ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
विषय सम्बन्ध से शून्य चैतन्यरूप परम पद मे प्रतिष्ठित हुआ अतएव बाह्य इन्द्रियो के
व्यापाररूप जाग्रत्-दशा में भी सुषुप्त निर्विकार वृत्ति मेँ समारूढ़ लब्धात्मा तत्त्वज्ञ जो जो कर्मानुष्ठान
करता है, उसमें वस्तुतः उसका कर्तृत्व नहीं रहता