Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 71, Verse 20
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 71, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 71 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
यथा शीतोष्णयोर्नित्यं परस्परविरुद्धयोः ।
न संभवति संबन्धो राम देहात्मनोस्तथा ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
हे राघव, जैसे किसी प्रयोजन की अभिलाषा न रखकर केवल लीलावश ही बालक पलंग के ऊपर
स्पन्दन क्रीडा करता है, वैसे ही आप भी किसी प्रयोजन की अभिलाषा न करते हुए कर्मो का अनुष्ठान
कीजिये