Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 70, Verse 3
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 70, verse 3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 70 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
चेत्यहीनं चिदालम्बं मनो यस्य गतज्वरम् ।
तेनाम्बु कतकेनेव जनता संप्रसीदति ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
न आधिभौतिक भार्या,
चाकर आदि विषयों में, न उनके उपभोग की इन्द्रियवृत्तियों मे, न आध्यात्मिक वस्तुओं में और न प्राण,
मूर्धा तथा तालू में - जो योग शास्त्र में वर्णित काम्य सिद्धि अनुकूल धारणा के स्थानस्वरूप हैं - मन को
कभी आसक्त करना चाहिए