Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 70, Verse 2
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 70, verse 2 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 70 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
प्रक्षुब्धाक्षुब्धदेहस्याविसंवादेन संविदः ।
अन्तःपूर्णस्य वदने श्रीरिन्दोरिव लक्ष्यते ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
न साध्य पदार्थों की चेष्टाओं में,
न अतीत काल की वस्तुओं की चिन्ताओं में, न वर्तमान कालीन वस्तुओं में, न आकाश में, न नीचे, न
मध्य में, न दिशाओं में और न लताओं में मन को आसक्त करना चाहिए