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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 70, Verse 11

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 70, verse 11 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 70 · श्लोक 11

संस्कृत श्लोक

अत्र प्रौढिमुपायातः सूर्यतामेति पावनीम् । परिणामवशादिन्दुरमावास्यार्कतामिव ॥ ११ ॥

हिन्दी अर्थ

अथवा पूर्वोक्त सात्विक बुद्धि का भी परित्याग कर निर्विकार चित्‌-स्वरूप जीव अपने स्वरूप में उस प्रकार शान्त होकर अवस्थित रहे, जिस प्रकार कि प्रदीप्त हो रहा मणि अपने स्वरूप में शान्त होकर अवस्थित रहता हे