Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 69, Verse 1
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 69, verse 1 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 69 · श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
सर्वदा सर्वसंस्थेन सर्वेण सह तिष्ठता ।
सर्वकर्मरतेनापि मनः कार्यं विजानता ॥ १ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामजी ने कहा : भगवान्, संग किस प्रकार से होता है किस तरह का संग मनुष्यों को बन्धन में
डालता है ? कैसा संग मोक्ष का कारण हैं ? और संग की चिकित्सा (निवृत्ति) कैसे की जा सकती है ?
सर्ग सन्दर्भ
सड़सठवाँ सर्ग समाप्त अड़सठवाँ सर्ग॑ संसक्ति ओर असंसक्त के लक्षण, वन्द्या-अवन्ध्याविभाग तथा फल का वर्णन ।