Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 68, Verse 42
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 68, verse 42 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 68 · श्लोक 42
संस्कृत श्लोक
परिसक्तमतेर्देहान्सिकताः पत्युरम्भसाम् ।
कः शक्तः परिसंख्यातुं त्रसरेणुगणं यथा ॥ ४२ ॥
हिन्दी अर्थ
अहन्ता आदि अनात्म अध्यासो
से विनिर्मुक्त जीव विक्षेपो से शून्य सुखो का पूर्ण अनुभव करता है । वह बाहर से कुछ करेया कुछ न
करे, पर सर्वथा कर्तृत्व ओर भोक्तृत्व से रहित ही है