Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 67, Verse 6
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 67, verse 6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 67 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
मनसि क्षुब्धतां याते चित्त्वस्याङ्ग किमागतम् ।
तरङ्गजलसंताने वैपरीत्यं किमम्बुधेः ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, मन के क्षुब्ध हो जाने
पर चित्स्वभाव आत्मा के पूर्णत्व-स्वरूप में क्या क्षति हुई ? क्या तरंगों के रूप में जल का विस्तार हो
जाने पर पूर्णस्वभाव समुद्र में विपरित्य यानी पूर्णतास्वरूप की हानि पहुँचती है ?