Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 67, Verse 5
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 67, verse 5 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 67 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
देहे दुःखातिसंक्षुब्धे का नः क्षतिरुपस्थिता ।
रथे विधुरिते भग्ने सारथेः केव खण्डना ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
भले ही देह
दुखों से अत्यन्त क्षुब्ध हो जाय, उससे हमें (आत्मा में) कौन सी क्षति पहुँची ? रथ के घुरारहित होने पर
या तुट जाने पर सारथियों को कौन सी क्षति पहुँचती है ?