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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 66, Verse 30

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 66, verse 30 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 66 · श्लोक 30

संस्कृत श्लोक

कलाकुलजगत्कार्यकल्लोलाकुलसंकुला । क्रियासरिदपर्यन्ता वहत्याकुलकोटरा ॥ ३० ॥

हिन्दी अर्थ

शिल्प, तर्क, नीतिशास्त्र आदि कौशलों से व्याप्त जगत्‌ के व्यवहाररूप तरंगों से परिपूर्ण, क्षुब्धतारूपी कोटरों से युक्त यह प्रवृत्तिरूपा नदी, जिसका पारावार ही नहीं हे, प्रत्येक जन्म में ऐसे ही निरर्थक बहती रहती हे