Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 66, Verse 29
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 66, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 66 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
यौवनोत्कटकल्लोला वहल्लोलासिफेनिला ।
परावर्तमहावर्ता याति जीवितदुर्नदी ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
जिसमें यौवन ही बड़े-बड़े तरंग हैं; चल रही चंचल तलवार के सदृश
काम, क्रोध, द्वेष, भय आदि ही जिस में फेन हैं तथा लोभ, तृष्णा आदि से यत्र-तत्र होने वाले परिभ्रमण
ही जिसमें बड़े-बड़े आवर्त हैं, ऐसी जीवितरूपी दुष्ट नदी व्यर्थ ही जा रही है