Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 66, Verse 18
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 66, verse 18 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 66 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
दुःखैः सुखलवाकारैर्दीर्घादीर्घैः शुभाशुभैः ।
अपर्याप्तागमापायाः प्रयान्त्यायान्ति रात्रयः ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
जिनमें सुख के लेशमात्र आकार ही है, ऐसे चिरकाल
ओर अल्पकाल तक भोग्य होने के कारण दीर्घ एवं अदीर्घं पुण्य-पापात्मक कर्मरूपी दुःखों से कभी
समाप्त न होनेवाले आगम और अपगमसे युक्त रात्रिया (कालमात्र) समस्त जन्मों मे आती ओर जाती
रहती हैं