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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 64, Verse 49

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 64, verse 49 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 64 · श्लोक 49

संस्कृत श्लोक

केवलं चित्प्रकाशांशकलिका स्थिरतां गता । तुर्या चेत्प्राप्यते दृष्टिस्तत्तया सोपमीयते ॥ ४९ ॥

हिन्दी अर्थ

यदि चेतन के प्रकाशात्मक अंश से गृहीत स्थिरता को प्राप्त तुरीय दृष्टि प्राप्त हो, तो उसी तुरीय दृष्टि से निर्विकल्प अवस्था का (परमेश्वर-स्वरूपाविर्भाव-दशा का) सादृश्य कहा जा सकता है, दूसरे का नहीं