Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 64, Verse 48
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 64, verse 48 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 64 · श्लोक 48
संस्कृत श्लोक
परिपूर्णार्णवप्रख्या न वा गोचरमेति नः ।
नोपमानमुपादत्ते नानुधावति रञ्जनम् ॥ ४८ ॥
हिन्दी अर्थ
उसी निर्विकल्प अवस्था का वर्णन करते हैं।
परिपूर्ण समुद्र की तरह असीम वह निर्विकल्प अवस्था न तो सब लोगों के मन की विषय है, न तो किसी
उपमान से उपमित की जा सकती है ओर न विषयों के सम्बन्धों को प्राप्त करती हे