Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 64, Verse 44

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 64, verse 44 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 64 · श्लोक 44

संस्कृत श्लोक

एतावतैव देवेशः परमात्मावगम्यते । काष्ठलोष्टसमत्वेन देहो यदवलोक्यते ॥ ४४ ॥

हिन्दी अर्थ

मन के द्वारा रची गई बाह्य और आध्यात्मिक आसक्तियों का निरसन कर जो अहंकारभाव काट दिया जाता है, बस उतने काटनेमात्र से ही परमात्मा का ज्ञान होने तक अनुष्ठित विचार में आत्मा पूर्णरूप से विस्पष्ट-रीति से प्रकट भाव को प्राप्त हो जाता है ॥४ ३॥ उसमें भी दुस्त्यज देहाभिमान का परित्याग ही मुख्य है, इस आशय से कहते हैं। काठ और मिट्टी के ढेले की तरह यह देह है, इस प्रकार का जो देखना है, उतने मात्र से ही देवाधिदेव परमात्मा जाना जाता है