Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 64, Verses 39–40
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 64, verses 39–40 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 64 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
वैराग्याभ्यासयत्नाभ्यां स्वपरामर्शजन्मना ।
तत्त्वालोकनपोतेन तीर्यते भवसागरः ॥ ३९ ॥
शोच्यमानं जनैर्नित्यं दह्यमानं दुराशया ।
नात्मानमवमन्येत प्रोद्धरेदेनमादरात् ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
वैराग्य ओर अभ्यासरूपी प्रयत्नों के द्वारा किये गये आत्मविचार से
उत्पन्न आत्मतत्त्व साक्षात्कार रूपी बड़े जहाज से यह भवसागर पार किया जाता है