Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 64, Verse 37
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 64, verse 37 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 64 · श्लोक 37
संस्कृत श्लोक
न धनानि न मित्राणि न शास्त्राणि न बान्धवाः ।
नराणामुपकुर्वन्ति मग्नस्वात्मसमुद्धृतौ ॥ ३७ ॥
हिन्दी अर्थ
अज्ञान में डूबी
हुई अपनी आत्मा का उद्धार करने में मनुष्यों को धन, मित्र, अनात्मशास्त्र ओर बान्धव ये कुछ भी
उपकार नहीं करते